STORYMIRROR

माणुसकी गरिबी सारे मराठी दूर लक्षात विश्रांती आभास वाटते जगायला नकोच कविता वास्तव मजला काळा डोह सावराया हवे आता हवे काय निवारा तसे

Marathi हवे हवेसे Poems