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काळा डोह जगायला माणुसकी सावराया हवे आता हवे आभास तसे नोंद सारे मजला विश्रांती लक्षात वाटते दूर वास्तव जिंदगानी निवारा विचारले नकोच काय

Marathi हवे हवेसे Poems